
आदि क्षेत्रों से बुजुर्ग माताएं,विधवाएं भगवान् कृष्ण नगरी वृन्दावन में अपना जीवन यापन करने आती हैं | जहाँ उन्हें दो जून की रोटी तक नसीब नहीं हो रही है
दोस्तों इस विषय के बारे में पता चला ह्रदय विचलित हो उठा सोचा बात आप तक भी पहुंचे ऐसी कोशिश कर रहा हूँ | बात घर के बुजुर्गों की हो रही है बात उन महिलाओं की हो रही है जिनकी शादी अपने से दो गुनी उम्र के मर्द से कर दी गयी या जब वो दस ग्यारह साल की थी तभी उनकी शादी बीस बाईस साल के लड़के से कर दी गयी जिसका परिणाम वो महिलाएं आज भुगत रही है यहाँ बंगाल उड़ीसा मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ आदि राज्यों से वृद्धाएँ हर माह वृन्दावन पहुँच रही हैं जिनमे बंगाल की महिलाओं की संख्या सर्वाधिक है जब हमारी टीम ने उन विधवाओं से बात की तो उन्होंने बताया की वो सत्संग करके रोज 8 रुपये कमाती हैं |सुबह जब चार घंटे सत्संग का 4 रूपया मिलता हैं इसी तरह शाम को चार घंटे सत्संग करने पर चार रुपये और इसी तरह एक महीने में 240 रुपयें में रहने को मजबूर हैं विधवाएं | तमाम एन जी ओ इस बात का दंभ भरते हैं की वो विधवाओं को एक वक्त की रोटी देते हैं लेकिन उनकी पहुँच कुछ एक विधवाओं तक ही सीमित रह गयी है वृन्दावन में लगभग 20 हजार विधवाएं हैं जोकि भीख मांग कर ,किसी के घर बर्तन साफ़ कर गुजारती है समय ....क्योंकि वो बेघर हैं उन्हें कही आसरा नहीं मिला बसेरा नहीं मिला कही खाना नहीं मिला







