Friday, November 23, 2012

पुजारा में उभर रहा है द्रविड़ का अक्स

इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में दोहरा शतक 206* और 41* अविजित परियां खेलने वाले चेतेश्वर पुजारा ने दुसरे टेस्ट में भी शानदार धैर्य का परिचय देते हुए शतक 135 लगाया जिससे भारत मुंबई टेस्ट की पहली इनिंग में 327 एक सम्मान जनक स्कोर तक पहुँच सका । पुजारा ने लगभग आठ् घंटे तक टिककर बल्लेबाजी की और बेहतरीन कापी बूक स्टायल में दर्शनीय स्ट्रोक लगाये । भारत के महान बल्लेबाजों में  शुमार द्रविड़ और लक्ष्मण के सन्यास लेने के बाद भारत को ऐसे ही एक भरोसे मंद खिलाडी की तलाश थी ।जो पुजारा के आने के बाद लगभग पूरी होती दिख रही है .... 

Tuesday, October 16, 2012

Arvind Kejriwal--aknowledgement


Arvind Kehriwal was born on 16th June, 1968, in district Hissar of Haryana. He completed his mechanical engineering studies in the year 1989 from IIT kharagpur, West Bengal. After graduation he joined Tata Steel and worked there till 1992, when he cracked civil services examination. He got selected for Indian Revenues Services and joined as a Joint Commissioner at Income tax office in New Delhi. But he took leave from the office in the year 2000 and started a NGO named Privartran. In February, 2006 he formally resigned from the job and started working actively in various social causes.
Parivartan is one of his prominent moves to work towards a corruption free nation. It is run by few volunteers who had indeed helped several people in overcoming their problems while standing hard against corruption. Parivartan has done extensive work in the fields of public distribution system and education. It is still active in bringing out the maximum benefits from RTI.
Arvind Kejriwal had worked extensively for implementation of Central Right to Information Act. He had followed the right to information act, Delhi. In the year 2006, he was awarded with Ramon Magsaysay Award for Emergent Leadership. He invested all the prize money in his NGO for various social causes.
Another movement which has gained him fame and brought in lime light is the recent struggle for implementation of Lok Pal Bill in its true form. Being an active member of drafting committee and a strong follower of Anna Hazare, he has carved his own niche.
During his life time, he had met Mother Teresa and was highly impressed by her selfless service attitude. During that period he had actively served people in Kaali ghat in West Bengal and followed the way shown by Mother Teresa.
His main motto is to create a corruption free society. He received overwhelming response on the national as well as global front. He sees corruption as a symptom and not as the main problem. He also integrates it with prevailing poverty in the country. Lack of basic amenities and shortage of resources give rise to corruption.
To tackle this problem he believes in granting more governing power in hands of people. He emphasises on decentralisation of the power and distributing it to the smaller factors of governance. Empowering panchayats and gram sabhaas is his next plan of action.
Arvind Kejriwal is a striking example of emerging youth power of the nation. By playing an active role in core committee of Anna Hazare and leading masses from front, he has emerged as a youth icon.
Presently he lives in National Capital region near Delhi with his wife Sunita and two kids. He has made a team of capable and enthusiastic persons from various walks of life and together they are working for the betterment of the country's future. Arvind Kejriwal has a clear vision and an effective plan to execute it. Being a youth icon he realizes his responsibility and has a long way to go.

Wednesday, October 3, 2012

गुजरात और हिमाचल प्रदेश के लिए चुनाव की तारीखें घोषित

चुनाव आयोग की घोषणा के मुताबिक हिमाचल प्रदेश  में 4   नवम्बर को जबकि गुजरात में 13 एवं 17 दिसम्बर को मतदान होगा। दोनों राज्यों में मतगणना 20 दिसम्बर को होगी। उत्तर प्रदेश, गोवा, पंजाब, उत्तराखण्ड तथा मणिपुर विधानसभाओं के लिए इस साल फरवरी-मार्च में हुए चुनाव के बाद ये साल के सबसे अधिक महत्वपूर्ण चुनाव हैं। और बड़ी बात ये है की दोनों ही राज्यों में बीजेपी की सत्ता है |गुजरात के ये चुनाव मोदी के प्रधानमंत्री पद पर मोहर लगा सकते हैं यदि वह फिर से गुजरात में आये तो | मुख्य निर्वाचन आयुक्त वीए सम्पथ ने बुधवार को बताया कि हिमाचल प्रदेश में चुनाव की अधिसूचना 10 अक्टूबर को जारी होगी और नामांकन की आखिरी तारीख 17 अक्टूबर होगी। नामांकन पत्रों की जांच 18 अक्टूबर को होगी एवं नाम वापसी के लिए 20 अक्टूबर आखिरी तारीख है।
सम्पथ ने कहा कि राज्य में 68 विधानसभा सीटें और 45.16 लाख मतदाता हैं जिनके लिए 7252 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि गुजरात में दो चरणों में मतदान होगा। पहले चरण का मतदान 13 दिसम्बर एवं दूसरे चरण का मतदान 17 दिसम्बर को होगा। मतगणना 20 दिसम्बर को होगी।
गुजरात में पहले चरण के मतदान के लिए अधिसूचना 17 नवम्बर को जारी होगी। नामांकन की आखिरी तिथि 24 नवम्बर एवं नामांकन पत्रों की जांच 26 नवम्बर को होगी। नाम वापसी की आखिरी तारीख 28 नम्बर और मतदान 13 दिसम्बर को होगा।
दूसरे चरण की अधिसूचना 23 नवम्बर को जारी होगी जबकि नामांकन की आखिरी तारीख 30 नवम्बर है। नामांकन पत्रों की जांच एक दिसम्बर को और नाम वापसी की आखिरी तारीख तीन दिसम्बर है। मतदान 17 दिसम्बर को होगा। मतगणना 20 दिसम्बर को होगी।
सम्पथ ने कहा कि हम दोनों राज्यों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम करेंगे। इसके लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो अन्य राज्यों से भी सुरक्षा बलों को बुलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के चुनावी खर्च के साथ-साथ पेड न्यूज पर भी कड़ी निगाह रखेगी।
ज्ञात हो कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज ही गुजरात चुनाव के मद्देनजर पार्टी के प्रचार अभियान की शुरुआत की। उन्होंने राजकोट में एक रैली को सम्बोधित किया और चुनावी बिगुल फूंका।

Thursday, September 20, 2012

धोनी की सेना में है टी-20 वर्ड कप 2012 जीतने का दम

भारतीय टीम के सबसे सफल  कप्तान महेंद्र सिंह धोनी एक बार फिर से सफलता की इबारत लिखने श्रीलंका पहुँच गए हैं | उनके रनबाकुरों  की टीम इस प्रकार है-  एम् एस  धोनी (कप्तान ),सुरेश  रैना ,ज़हीर  खान ,वीरेन्द्र   सहवाग ,मनोज  तिवारी ,आर  आश्विन ,गौतम  गंभीर ,रोहित  शर्मा ,लक्ष्मी पति  बालाजी ,युवराज सिंह ,इरफ़ान पठान ,पियूष चावला ,विराट कोहली, हरभजन  सिंह और अशोक  डिंडा |18  सितम्बर 2012  दिन  मंगलवार शाम श्रीलंका और जिंबाब्वे के बीच पहले मैच के साथ चौथा  T-20 वर्ल्ड कप शुरू हो चुका है   । श्रीलंका में 12 टीमों के बीच चलने वाली यह क्रिकेट वॉर 7 अक्टूबर को फाइनल मुकाबले तक प्रेमदासा स्टेडियम पहुंचेगी। इस बार जिन दो टीमों को क्वॉलिफायर में जगह मिली है, वे हैं- आयरलैंड और अफगानिस्तान। भारत को ग्रुप ए में  है, जहां वो 19  सितम्बर को अफगानिस्तान से अपना पहला मैच  23  रनों से जीत चुका है अब उसे इंग्लैंड से 23  सितम्बर को भिड़ना है | सन् 2007 में साउथ अफ्रीका में हुए पहले टी-20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान को हराकर भारत ने जीत अपने नाम कर ली थी। इसके बाद 2009 में दूसरा टी-20 वर्ल्ड कप इंग्लैंड में हुआ जहां फाइनल में श्रीलंका को हराकर पाकिस्तान ने कप जीत लिया था। तीसरा वर्ल्ड कप वेस्टइंडीज में सन् 2010 में हुआ, जहां इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर कप पर कब्जा किया।

 यहां अधिकांश मैच डे-नाइट होने हैं। जाहिर है, इनमें स्विंग बोलर्स को शाम की हवा का फायदा मिलेगा। टूर्नामेंट में दावा तो भारत का मजबूत है, लेकिन टी-20 मुकाबले में कौन सी टीम किस दिन अच्छा खेल जाएगी, यह कहना बहुत मुश्किल होता है। पाकिस्तान एक बार विजेता और एक बार रनर अप रहा है। उसे कम आंकना भारी भूल होगी। वॉर्म अप मैच में उसने यह दिखा भी दिया है। इस बार ऐसे खिलाड़ी करीब-करीब हर प्रमुख टीम में मौजूद हैं, जिनमें खेल का रुख पलटने की भरपूर क्षमता है।
इंडियन बैट्समैन विराट कोहली और वीरेन्द्र  सहवाग ही नहीं, वापसी करने वाले युवराज भी पूरे जोश में हैं। युवराज ने  पहले मैच में आल राउंड प्रदर्शन करके सबके भरोसे को कायम रक्खा है | स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में उनके लगाए छह सिक्सर लोग अभी तक याद करते हैं।
उनसे एक बार फिर धमाकेदार पारिओं  की उम्मीद होगी | भारत के पास विराट कोहली और युवराज सिंह जैसे दो नायाब हीरे हैं जो कभी भी मैच पलटने की क्षमता रखते हैं | बैटिंग   के साथ साथ बालिंग में भी इंडिया मजबूत है | भारत के पास   जहीर ,इरफ़ान ,बालाजी अशोक तथा चावला ,आर आश्विन और हरभजन की फिरकी भी है

20 सितम्बर भारत बंद का देशभर में मिलाजुला असर

फोरेंन डाइरेक्ट इन्वेस्टमेंट अर्थात खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को पारित   कर सरकार  आम किसान के फायदे    की बात कर रही   है | FDI  के रिटेल में लागू होने की घोषणा के अगले  ही दिन  से  विपक्ष और  TMC  सहित UPA  को अपने ही सहयोगी दलों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है | आज 20  सितम्बर को भारत बंद है जिसमे विपक्षी दलों और UPA  के सहयोगी दलों ने डीजल के दामों में वृद्धि, खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को मूंजरी और सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या घटाए जाने के केंद्र के फैसले के खिलाफ राजग, वाम दलों और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया | जिससे आज दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, पंजाब तथा हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों में सामान्य जनजीवन पर असर पड़ा। मुंबई में गणेश उत्सव के चलते इसका असर काफी कम रहा।
उत्तर भारत में सबसे अधिक ट्रेनों का यातायात प्रभावित हुआ है। इलाहाबाद, कानपुर, वाराणसी, मथुरा, फरीदाबाद और पटना में अलग अलग पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ट्रेनें रोकीं तो अमृतसर में शिवसेना ने सुबह से ही जबरन दुकानें बंद करानी शुरू कर दीं।
वहीं सरकार से नाराज ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस हड़ताल में शामिल नहीं है। ममता ने इस सिलसिले में अपना रुख़ साफ कर दिया है कि वह बंद की राजनीति नहीं करतीं। उन्होंने एक  दिन पहले ही सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा की है

Tuesday, August 14, 2012

वृन्दावन में विधवाओं की हो रही दुर्गति

हर माह भारत के बंगाल, बिहार, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और  मध्य प्रदेश
आदि क्षेत्रों से बुजुर्ग माताएं,विधवाएं  भगवान् कृष्ण नगरी वृन्दावन में अपना जीवन यापन करने आती हैं | जहाँ उन्हें दो जून की रोटी तक नसीब नहीं हो रही है
दोस्तों इस विषय के बारे में पता चला ह्रदय विचलित हो उठा सोचा बात आप तक भी पहुंचे ऐसी कोशिश कर रहा हूँ | बात घर के बुजुर्गों की हो रही है बात उन महिलाओं की हो रही है जिनकी शादी अपने से दो गुनी उम्र के मर्द से कर दी गयी या जब वो दस ग्यारह साल की थी तभी उनकी शादी बीस बाईस साल के लड़के  से कर दी गयी जिसका परिणाम वो महिलाएं आज भुगत  रही है यहाँ  बंगाल  उड़ीसा मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ आदि राज्यों से वृद्धाएँ हर माह वृन्दावन पहुँच रही हैं जिनमे बंगाल की महिलाओं की संख्या सर्वाधिक है जब हमारी टीम ने उन विधवाओं से बात की तो उन्होंने बताया की वो सत्संग करके रोज 8  रुपये कमाती हैं |सुबह जब चार घंटे सत्संग का 4   रूपया  मिलता  हैं  इसी तरह शाम को चार घंटे सत्संग करने पर चार रुपये  और इसी तरह एक महीने में 240  रुपयें में रहने को मजबूर हैं विधवाएं | तमाम एन जी  ओ  इस बात  का दंभ भरते हैं की वो विधवाओं को एक वक्त की रोटी देते हैं लेकिन उनकी पहुँच कुछ एक विधवाओं तक ही सीमित रह गयी है वृन्दावन में लगभग 20  हजार  विधवाएं हैं जोकि भीख मांग कर ,किसी के घर बर्तन साफ़ कर गुजारती है समय ....क्योंकि वो बेघर हैं उन्हें कही आसरा नहीं मिला बसेरा नहीं मिला कही खाना नहीं मिला
अब आप ये बताओ आज के ज़माने में कोई एक दिन का खर्च भला 8  रुपये में चला सकता है  | लेकिन शायद खुदा है उन माताओं का जो उन्ही आठ रुपये को खर्चती और जमा करती है जिससे उनका रहने का किराया जो अमूनन 200  रुपये लिया जाता है वो भी देतीं है | हमारी टीम  से बात करते हुए एक विधवा महिला बुरी तरह रो पड़ी शायद इन आंसुओं  से बहुत पुराना रिश्ता रहा उसका | "महिला ने बताया की 11  बरस की थी तब मेरा  40 बरस के आदमी  से ब्याह हो गया  गयी मेरे दो लाला भी हैं उनकी भी उनका ब्याह भी मैं कर चुकी है हमरा आदमी 8  बरस पहले मर गया फिर मैं अपने ललन तीर रही | वे हमें रोटी नहीं देते थे कहते दूसरा लड़का के पास जाओ और दूसरा के पास जाओ तब वो बहु कहती उकरे के पास रहो मै थक गयी थी बुढ़ापे में काम नहीं होता था शरीर से तब मैं सब छोड़ कर चली आई" |ये पूछने पर की आपको अब अपने बच्चों की याद नहीं आती तब महिला ने रोते हुए बताया कि हमरे लिए किसी के पास टीम ही नयी है ऊ लोग मजदूरी करता है अपने बच्चों का पेट पलता है इधर मैं अपना पेट के खातिर पड़ा है अब मैं उस देश कभी नहीं जाउंगी वृन्दावन में ही मर जाउंगी | फिर हमारी बात एक एन जी ओ संचालिका से हुयी जहाँ नए रहष्यों से पर्दा उठाना लाजिमी था |एन जी ओ संचालिका तक़रीबन 50  बर्षीय महिला है जोकि खुद इश्वर कि सताई  हुई है वो भी विधवा ही हैं वो एक स्वतंत्र संस्था चलती हैं जिसमे विधवाओं कि देखरेख और भोजनादि का प्रबंध शामिल है | उनसे ये पूंछने पर कि हमने यहाँ सुना है कि कई विधवाओं के मरने के बाद लाश को टुकड़ों में काट कर फेंक दिया जाता है क्यूँ कोई इतनी जहमत नहीं उठाता कि शव का अंतिम संस्कार जैसे भी हो सके करवाना चाहिए अगर वो भी नहीं तो कम से कम दफ़न ही करवा दिया जाया करे ? एन जी ओ संचालिका -आपका आरोप गलत नहीं है यहाँ पिछले कुछ महीनो में ऐसी घटनाये सामने आई है की मानवता शर्मशार हुई है तकरीवन एक सप्ताह पहले की घटना है एक बुढ़िया के मर जाने पर मकान मालिक ने सफाई वाले को बुलाकर शव को उससे  बहार फिंकवा दिया और बाद में पता चल की सफाई वाला शव को एक बोरे में तोड़ मरोड़कर भर के ले गया था और कही रस्ते में ही किनारे फेंक कर चला आया इस काम के उसे 200  रुपये मिले थे | शायद आपको कुछ और नहीं बताना पड़ेगा थोडा बहुत अंदाजा हो गया होगा आपको भी वृन्दावन में वृद्दों की हालत का मंदिर ,सडक ,मोहल्ले ,रेलवे स्टेशन ,बस स्टैंड ,गुरूद्वारे के बाहर कही भी ये विधवा महिलाएं आपको भीख मांगती दिख जाएँगी |मैंने इनकी संख्या एक एन जी ओ के माध्यम से 20 ,000  आंकी है | कुछ सुझाव निम्नलिखित है ...

Saturday, August 4, 2012

राजनीति में आने से घटेगा अन्ना का कद

ओलंपिक में भारत का बढता कद wwwapnibaatcom.blogspot.in

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भारत को  नाटकीय ढंग से मिला ओलंपिक में तीसरा पदक सायना नेहवाल को उस समय पदक दे दिया गया जब तीसरे स्थान के लिए चीन की शेन और  सायना नेहवाल  के बीच खेले जा रहे मुकाबले में शेन को घुटने में चोट आ गयी और उन्होंने गेम से हटने का फैसला किया 
बैडमिन्टन खिलाडी  सायना इस मुकाबले में 18 -21  0 -1  से पिछड़ रही थी लेकिन भाग्य ने उनका बखूबी साथ निभाया और दिला दिया भारत को एक और पदक | इससे पहले भारत के लिए बीजिंग ओलंपिक 2008  में   अभिनव बिंद्रा ने शूटिंग 10  मीटर एयर रायफल  में एक  स्वर्ण (gold),सुशील  कुमार पहलवान कास्य (bronze)
और मुक्केबाज विजेंद्र सिंह ने भी कास्य (bronze) पदक जीता था |
एथेंस ओलंपिक 2004   में शूटर  राज्य बर्धन सिंह राठौर  ने  पुरुषों की डबल ट्रैप प्रतिस्पर्धा  दिलाया था रजत (silver ) पदक | भारत को अब तक ओलंपिक 2012  में तीन पदक मिल चुके है जोकि इस प्रकार हैं
भारत के शूटर गगन नारंग ने पुरुषों की 10  मीटर एयर रायफल इवेंट में  कास्य (bronze) पदक जीत भारत को ओलंपिक 2012  का पहला मेडल दिलाया ,भारत के एक अन्य शूटर जोकि हिमाचल प्रदेश सेना में सुवेदार हैं विजय कुमार ने पुरुषों की 25  मीटर रैपिड फिर पिस्टल इवेंट में जीता चांदी (silver ) का तमगा और भारत की  बैडमिन्टन खिलाडी सायना नेहवाल ने  विमिंस सिंगल्स का  कास्य (bronze ) पदक जीता | इस समय ओलंपिक 2012  चल रहा है और भारत पदक तालिका में 3  पदकों के साथ 37  वें स्थान पर बना  हुआ है  | 
और आप को याद होगा कि 2008  बीजिंग ओलंपिक में भारत पदक तालिका में 50  वें स्थान पर रहा था और एथेंस ओलंपिक 2004  में भारत पदक तालिका में 65  स्थान पर था  |
भारत को अभी इस ओलंपिक में कम से कम तीन मेडल की और आस होगी बोक्सिंग में अभी विजेंद्र कुमार ,विजेंद्रो सिंह और मनोज कुमार से पदक की आस है तथा शूटिंग में अभी उम्मीदे और भी हैं क्योंकि गगन अभी भी  50 मीटर राइफल प्रोन और 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन में भी परफार्म करना है जहा भारत को एक और पदक मिल सकता है | पदक के प्रबल दावेदारों में से एक भारत की स्टार मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम ने लंदन ओलिंपिक की महिला मुक्केबाजी प्रतियोगिता के 51 किलोग्राम भार वर्ग में विजयी शुरुआत करते हुए क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है। इस शानदार जीत के बाद मैरीकॉम से  भी पदक की उम्मीदें बढ़ गई हैं

Friday, July 27, 2012

भारत के 13 वें महामहिम प्रणव उर्फ़ पोळटू दा पर एक नजर

प्रणव मुखर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले में किरनाहर शहर के निकट स्थित मिराती गाँव के एक ब्राह्मण परिवार में कामदा किंकर मुखर्जी और राजलक्ष्मी मुखर्जी के यहाँ हुआ था।
उनके पिता 1920 से कांग्रेस पार्टी में सक्रिय होने के साथ पश्चिम बंगाल विधान परिषद में 1952 से 64 तक सदस्य और वीरभूम (पश्चिम बंगाल) जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके थे। उनके पिता एक सम्मानित स्वतन्त्रता सेनानी थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन की खिलाफत के परिणामस्वरूप 10 वर्षो से अधिक जेल की सजा भी काटी थी।
प्रणव मुखर्जी ने सूरी (वीरभूम) के सूरी विद्यासागर कॉलेज में शिक्षा पाई, जो उस समय कलकत्ता विश्वविद्यालय से सम्बद्ध था।
कलकत्ता विश्वविद्यालय से उन्होंने इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर के साथ साथ कानून की डिग्री हासिल की है। वे एक वकील और कॉलेज प्राध्यापक भी रह चुके हैं। उन्हें मानद डी.लिट उपाधि भी प्राप्त है। उन्होंने पहले एक कॉलेज प्राध्यापक के रूप में और बाद में एक पत्रकार के रूप में अपना कैरियर शुरू किया। वे बाँग्ला प्रकाशन संस्थान देशेर डाक (मातृभूमि की पुकार) में भी काम कर चुके हैं। उनका संसदीय कैरियर करीब पाँच दशक पुराना है, जो 1969 में कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य के रूप में (उच्च सदन) से शुरू हुआ था। वे 1975, 1981, 1993 और 1999 में फिर से चुने गये। 1973 में वे औद्योगिक विकास विभाग के केंद्रीय उप मन्त्री के रूप में मन्त्रिमण्डल में शामिल हुए।
वे सन 1982 से 1984 तक कई कैबिनेट पदों के लिए चुने जाते रहे और और सन् 1984 में भारत के वित्त मंत्री बने। सन 1984 में, यूरोमनी पत्रिका के एक सर्वेक्षण में उनका विश्व के सबसे अच्छे वित्त मंत्री के रूप में मूल्यांकन किया गया। उनका कार्यकाल भारत के अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के ऋण की 1.1 अरब अमरीकी डॉलर की आखिरी किस्त नहीं अदा कर पाने के लिए उल्लेखनीय रहा। वित्त मंत्री के रूप में प्रणव के कार्यकाल के दौरान डॉ. मनमोहन सिंह भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर थे। वे इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव के बाद राजीव गांधी की समर्थक मण्डली के षड्यन्त्र के शिकार हुए जिसने इन्हें मन्त्रिमणडल में शामिल नहीं होने दिया। कुछ समय के लिए उन्हें कांग्रेस पार्टी से निकाल दिया गया। उस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक दल राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस का गठन किया, लेकिन सन 1989 में राजीव गान्धी के साथ समझौता होने के बाद उन्होंने अपने दल का कांग्रेस पार्टी में विलय कर दिया। उनका राजनीतिक कैरियर उस समय पुनर्जीवित हो उठा, जब पी.वी. नरसिंह राव ने पहले उन्हें योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में और बाद में एक केन्द्रीय कैबिनेट मन्त्री के तौर पर नियुक्त करने का फैसला किया। उन्होंने राव के मंत्रिमंडल में 1995 से 1996 तक पहली बार विदेश मन्त्री के रूप में कार्य किया। 1997 में उन्हें उत्कृष्ट सांसद चुना गया।
सन 1985 के बाद से वह कांग्रेस की पश्चिम बंगाल राज्य इकाई के भी अध्यक्ष हैं। सन 2004 में, जब कांग्रेस ने गठबन्धन सरकार के अगुआ के रूप में सरकार बनायी, तो कांग्रेस के प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह सिर्फ एक राज्यसभा सांसद थे। इसलिए जंगीपुर (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से पहली बार लोकसभा चुनाव जीतने वाले प्रणव मुखर्जी को लोकसभा में सदन का नेता बनाया गया। उन्हें रक्षा, वित्त, विदेश विषयक मन्त्रालय, राजस्व, नौवहन, परिवहन, संचार, आर्थिक मामले, वाणिज्य और उद्योग, समेत विभिन्न महत्वपूर्ण मन्त्रालयों के मन्त्री होने का गौरव भी हासिल है। वह कांग्रेस संसदीय दल और कांग्रेस विधायक दल के नेता रह चुके हैं, जिसमें देश के सभी कांग्रेस सांसद और विधायक शामिल होते हैं। इसके अतिरिक्त वे लोकसभा में सदन के नेता, बंगाल प्रदेश कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष, कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मंत्रिपरिषद में केन्द्रीय वित्त मन्त्री भी रहे। लोकसभा चुनावों से पहले जब प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने अपनी बाई-पास सर्जरी कराई, प्रणव दा विदेश मन्त्रालय में केन्द्रीय मंत्री होने के बावजूद राजनैतिक मामलों की कैबिनेट समिति के अध्यक्ष और वित्त मन्त्रालय में केन्द्रीय मन्त्री का अतिरिक्त प्रभार लेकर मन्त्रिमण्डल के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे।
सन 1984 में उन्होंने आईएमएफ और विश्व बैंक से जुड़े ग्रुप-24 की बैठक की अध्यक्षता की। मई और नवम्बर 1995 के बीच उन्होंने सार्क मन्त्रिपरिषद सम्मेलन की अध्यक्षता की।
मुखर्जी को पार्टी के भीतर तो मिला ही, सामाजिक नीतियों के क्षेत्र में भी काफी सम्मान मिला है। अन्य प्रचार माध्यमों में उन्हें बेजोड़ स्मरणशक्ति वाला, आंकड़ाप्रेमी और अपना अस्तित्व बरकरार रखने की अचूक इच्छाशक्ति रखने वाले एक राजनेता के रूप में वर्णित किया जाता है।
जब सोनिया गान्धी अनिच्छा के साथ राजनीति में शामिल होने के लिए राजी हुईं तब प्रणव उनके प्रमुख परामर्शदाताओं में से रहे, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में उन्हें उदाहरणों के जरिये बताया कि उनकी सास इंदिरा गांधी इस तरह के हालात से कैसे निपटती थीं। मुखर्जी की अमोघ निष्ठा और योग्यता ने ही उन्हें यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और प्रधान मन्त्री मनमोहन  के करीब लाया और इसी वजह से जब 2004 में कांग्रेस पार्टी सत्ता में आयी तो उन्हें भारत के रक्षा मंत्री के प्रतिष्ठित पद पर पहुँचने में मदद मिली।
सन 1991 से 1996 तक वे योजना आयोग के उपाध्यक्ष पद पर आसीन रहे।
2005 के प्रारम्भ में पेटेण्ट संशोधन बिल पर समझौते के दौरान उनकी प्रतिभा के दर्शन हुए। कांग्रेस एक आईपी विधेयक पारित करने के लिए प्रतिबद्ध थी, लेकिन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन में शामिल वाममोर्चे के कुछ घटक दल बौद्धिक सम्पदा के एकाधिकार के कुछ पहलुओं का परम्परागत रूप से विरोध कर रहे थे। रक्षा मन्त्री के रूप में प्रणव मामले में औपचारिक रूप से शामिल नहीं थे, लेकिन बातचीत के कौशल को देखकर उन्हें आमन्त्रित किया गया था। उन्होंने मार्क्सवादी कम्युनिष्ट नेता ज्योति बसु सहित कई पुराने गठबन्धनों को मनाकर मध्यस्थता के कुछ नये बिंदु तय किये, जिसमे उत्पाद पेटेण्ट के अलावा और कुछ और बातें भी शामिल थीं; तब उन्हें, वाणिज्य मन्त्री कमल नाथ सहित अपने सहयोगियों यह कहकर मनाना पड़ा कि: "कोई कानून नहीं रहने से बेहतर है एक अपूर्ण कानून बनना। अंत में 23 मार्च 2005 को बिल को मंजूरी दे दी गई।
मुखर्जी की खुद की छवि पाक-साफ है, परन्तु सन् 1998 में रीडिफ.कॉम को दिये गये एक साक्षात्कार में उनसे जब कांग्रेस सरकार, जिसमें वह विदेश मंत्री थे, पर लगे भ्रष्टाचार के बारे में पूछा गया था तो उन्होंने कहा -
"भ्रष्टाचार एक मुद्दा है। घोषणा पत्र में हमने इससे निपटने की बात कही है। लेकिन मैं यह कहते हुए क्षमा चाहता हूँ कि ये घोटाले केवल कांग्रेस या कांग्रेस सरकार तक ही सीमित नहीं हैं। बहुत सारे घोटाले हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के कई नेता उनमें शामिल हैं। तो यह कहना काफी सरल है कि कांग्रेस सरकार भी इन घोटालों में शामिल थी

24 अक्टूबर 2006 को जब उन्हें भारत का विदेश मन्त्री नियुक्त किया गया, रक्षा मंत्रालय में उनकी जगह ए.के. एंटनी ने ली।
प्रणव मुखर्जी के नाम पर एक बार भारतीय राष्ट्रपति जैसे सम्मानजनक पद के लिए भी विचार किया गया था. लेकिन केंद्रीय मंत्रिमण्डल में व्यावहारिक रूप से उनके अपरिहार्य योगदान को देखते हुए उनका नाम हटा लिया गया। मुखर्जी की वर्तमान विरासत में अमेरिकी सरकार के साथ असैनिक परमाणु समझौते पर भारत-अमेरिका के सफलतापूर्वक हस्ताक्षर और परमाणु अप्रसार सन्धि पर दस्तखत नहीं होने के बावजूद असैन्य परमाणु व्यापार में भाग लेने के लिए परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह के साथ हुए हस्ताक्षर भी शामिल हैं। सन 2007 में उन्हें भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा गया।  मनमोहन सरकार में मुखर्जी भारत के वित्त मन्त्री बने। इस पद पर वे पहले 1980 के दशक में भी काम कर चुके थे। 6 जुलाई, 2009 को उन्होंने सरकार का वार्षिक बजट पेश किया। इस बजट में उन्होंने क्षुब्ध करने वाले फ्रिंज बेनिफिट टैक्स और कमोडिटीज ट्रांसक्शन कर को हटाने सहित कई तरह के कर सुधारों की घोषणा की। उन्होंने ऐलान किया कि वित्त मन्त्रालय की हालत इतनी अच्छी नहीं है कि माल और सेवा कर लागू किये बगैर काम चला सके। उनके इस तर्क को कई महत्वपूर्ण कॉरपोरेट अधिकारियों और अर्थशास्त्रियों ने सराहा। प्रणव ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम, लड़कियों की साक्षरता और स्वास्थ्य जैसी सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं के लिए समुचित धन का प्रावधान किया। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम, बिजलीकरण का विस्तार और जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन सरीखी बुनियादी सुविधाओं वाले कार्यक्रमों का भी विस्तार किया। हालांकि, कई लोगों ने 1991 के बाद लगातार बढ़ रहे राजकोषीय घाटे के बारे में चिन्ता व्यक्त की, परन्तु मुखर्जी ने कहा कि सरकारी खर्च में विस्तार केवल अस्थायी है और सरकार वित्तीय दूरदर्शिता के सिद्धान्त के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
बंगाल (भारत) में वीरभूम जिले के मिराती (किर्नाहार) गाँव में 11 दिसम्बर 1935 को कामदा किंकर मुखर्जी और राजलक्ष्मी मुखर्जी के घर जन्मे प्रणव का विवाह बाइस वर्ष की आयु में 13 जुलाई 1957 को शुभ्रा मुखर्जी के साथ हुआ था। उनके दो बेटे और एक बेटी - कुल तीन बच्चे हैं। पढ़ना, बागवानी करना और संगीत सुनना- तीन ही उनके व्यक्तिगत शौक भी हैं।
  1. न्यूयॉर्क से प्रकाशित पत्रिका, यूरोमनी के एक सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 1984 में दुनिया के पाँच सर्वोत्तम वित्त मन्त्रियों में से एक प्रणव मुखर्जी भी थे।
  2. उन्हें सन् 1997 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का अवार्ड मिला।
  3. वित्त मन्त्रालय और अन्य आर्थिक मन्त्रालयों में राष्ट्रीय और आन्तरिक रूप से उनके नेतृत्व का लोहा माना गया। वह लम्बे समय के लिए देश की आर्थिक नीतियों को बनाने में महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं। उनके नेत़त्व में ही भारत ने अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के ऋण की 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर की अन्तिम किस्त नहीं लेने का गौरव अर्जित किया। उन्हें प्रथम दर्जे का मन्त्री माना जाता है और सन 1980-1985 के दौरान प्रधानमन्त्री की अनुपस्थिति में उन्होंने केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल की बैठकों की अध्यक्षता की।
  4. उन्हें सन् 2008 के दौरान सार्वजनिक मामलों में उनके योगदान के लिए भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से नवाजा गया।

  5. प्रणब दा को पी एन डी ए समर्थित आदिवासी प्रत्याशी पी ए संगमा मामूली चुनौती मिली जिसे उन्होंने सहजता से स्वीकार किया
  6. भारत के 13 वे  राष्ट्रपति है  प्रणब  दा ।wwwapnibaatcom.blogspot.in

साल 2012 लाया गमो का तूफ़ान | पञ्च तत्व में विलीन हुई कई नामचीन हस्तियाँ

अभी देश रूस्‍तमे हिंद दारा सिंह की मौत के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि आज बॉलीवुड के पहले सुपरस्‍टार राजेश खन्‍ना (काका) भी हमे छोड़ कर चले गये।
बर्ष २०१२ रंग मंच की दुनिया में जो क्षति दिया है शायद वो कभी पूरी नहीं होगी इसी बर्ष हिंदी फिल्मों के जाने मने चुलबुले अभिनेता शम्मी कपूर नहीं रहे
उसके बाद प्रख्यात ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह भी ये कहते हुए चले गए ....शायद सभी दिवंगत कह रहे हो कि "मुसाफिर हूँ यारो न घर है न ठिकाना बस चलते जाना है यूँही चलते जाना "

हम जबान दिलों कि धड़कन राजेश खन्ना को कैसे भूल सकते हैं रोटी आराधन आनंद अमर प्रेम ये कुछ ऐसी फिल्मे है जो भुलाये नहीं भूलती और फिर इन फिल्मो में किशोर कुमार द्वारा गए हुए नगमे काया कहना ......इसी क्रम में विश्व विख्यात ग़ज़ल गायक मेहँदी हसन साहब का भी निधन हो गया

लन्दन ओलंपिक 2012 की शानदार शुरुआत

 विश्व के  30  वीं ओलंपिक खेल प्रतिश्पर्धा की शुरुआत २७ जुलाई को भारतीय समयानुसार रात 1 :30  लन्दन के स्थानीय समय 9  बजे लन्दन ओलंपिक पार्क में शानदार उद्घाटन हुआ समारोह की शुरुआत टूर दी फ्रांस के विजेता ब्रेंड ले विगिंस के वेल्स के बजाते ही शुरू हुई |    और पूरा लन्दन शहर सास्कृतिक कार्यक्रमों से  नहा उठा | और उस भव्य और प्राचीन रंगारंग कार्यक्रम ने लोगों को चमत्कृत कर दिया  लन्दन ओलंपिक खेलों की तीसरी    बार मेजबानी  रहा है | इससे पहले 1908  और 1948  में लन्दन खेलों की मेजबानी कर   चुका है | इस    मुबारक मौके पर   प्रिंस चार्ल्स अपनी पत्नी केट मिलिडटन के साथ मौजूद थे | और तक़रीबन 125  देशों के राष्ट्राध्यक्ष और बड़े-बड़े नेताओं ने समारोह में हिस्सा लिया | इससे पहले ओलंपिक मसल को स्टेडिं पहुँचाया गया जोकि हम्प्तन कोर्ट पैलेस से दक्षिण पश्चिम रायल पैलेस टेम्स नदी और टावर ऑफ़ लन्दन होते हुए पूर्वी लन्दन स्थित ओलंपिक स्टेडियम पहुंची थी |लन्दन ओलंपिक 2012  27  जुलाई से 12  अगस्त तक चलेगा जिसमे 81 भारतीय खिलाडियों का दल कुल 13  खेलो में भाग लेगा | इस महाकुम्भ में 204 देशो के 10500 खिलाडी शिरकत करेंगे |
इस खेल महाकुंभ में 204 देशों के लगभग 10,500 खिलाड़ी अपना सपना साकार करने की कोशिश करेंगे

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  देशों के  de लगभग 10,500 खिलाड़ी अपना सपना साकार करने की कोशिश करेंगे

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इस खेल महाकुंभ में 204 देशों के लगभग 10,500 खिलाड़ी अपना सपना साकार करने की कोशिश करेंगे

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Monday, July 16, 2012

कम बजट की फिल्मो ने किया है धमाल

बदल रहा है फ़िल्मी दर्शको का टेस्ट


चलो तो फिर बात शुरू करते है फिल्म डेल्ही बेल्ही से जिसमे फूहड़ता अपने चरम पर परोसी गयी और दर्शको ने उसका बड़े चाव से सेवन किया | यानि अब मान लेना चाहिए की आने वाले दिनों में हमें और भी अंतर देखने को मिल सकता है |   अनुराग कश्यप की गेन्स ऑफ़ वासेपुर इसका ताजा नमूना है अब आप कह सकते है की हमारा समाज एक परिवर्तन की डगर  से गुजर रहा है | फिल्म की सफलता की बात करे तो ये फिल्म बॉक्स ऑफिस की कसोटी  पर खरी उतरी और एक सप्ताह में ही 30  करोड़ का आंकड़ा पर कर गयी | इससे पहले आई दोस्ताना भी लोगों को काफी पसंद आई जिसमे पात्रों को समलैंगिक जोड़ा समझा गया था | अब तो हद ही हो गयी जितेन्द्र कपूर की बेटी एकता कपूर ला रही है क्या सुपर कूल है हम जिसे फिल्म प्रमाणन बोर्ड से मिला है "A "   CERTIFICATE  मिला है जोकि टेलीविजन पर नहीं दिखाई जा सकती जिसे प्योर अडल्ट मूवी घोषित किया गया है | विद्या वालन स्टारर डर्टी पिक्चर को भी जबरदस्त सफलता मिली थी | और तो और महेश भट्ट ला रहे है सन्नी लिओनी के साथ जिस्म -2  जिसे "A "  CERTIFICATE  ही मिलेगा जिसमे रणदीप हुड्डा सन्नी लिओनी से इश्क फरमाते नजर आयेंगे इससे पहले ये रोल बालीवुड के किसिंग स्टार  इमरान हाश्मी को मिला था जिन्होंने एक पोर्न स्टार के साथ काम करने से  साफ  इंकार कर दिया तब जाकर रणदीप की किस्मत खुली | तो देखा आपने कैसे बदल गया जमाना और बदल गया दर्शकों का टेस्ट

साउथ ने दिया 100 करोड़ क्लब


भारतीय सिनेमा खासकर बालीबुड साउथ की फिल्मो से काफी प्रभावित नजर आ रहा है तभी तो एक के बाद एक लगातार बनी है साउथ फिल्मो की रिमेक | गजनी फिल्म से लेकर  रेड्डी ,फ़ोर्स ,सिंघम,राउडी राठोर,बाडीगार्ड जैसी आधा दर्जन फिल्मों ने सौ करोड़ का आंकड़ा छुआ | जोकि पिछले ज़माने में बेहद मुस्किल काम हुआ करता था | लगता है हिंदी सिनेमा से दक्षिण भारतीय सिनेमा ज्यादा सुपरहिट है तभी तो लगी है साउथ फिल्मो के रिमेक बनाने की होड़ |

Sunday, July 15, 2012

andhera sansaar



क्या अँधा होना गुनाह है क्या अंधे हो जाने पर या अंधे लोग कभी नहीं देख पाएंगे  क्या हमारा फ़र्ज़ नहीं बनता की अंधे लोंगो की हम मदद करें ताकि वो इस जीवन को बोझ न समझें तो आओ हम संकल्प करें 
और नेत्रदान कर दूसरों के अँधेरे जीवन को रौशनी से भर दें .